jain dharm | Jainism | जैन धर्म | जैन धर्म kya hai | Jain dharm kya hai

जैन धर्म

•जैन धर्म विश्व के सबसे प्राचीन दर्शन या धर्मों में से एक है।
•jain dharm का वास्तविक प्रचार 6 वी शताब्दी ई. सा. पूर्व से देखने को मिलता है ।
•jainism परंपरा के अनुसार जैन धर्म में 24 तीर्थंकर हुए ।
• महावीर का जन्म 540 ई सा पूर्व बिहार के कुण्डलग्राम में हुआ था, इनके पिता का नाम सिद्धार्थ और माता का नाम त्रिशला था ।
• जब महावीर 30 वर्ष के हुए तब इनके माता पिता की मृत्यु हो गई थी, इसके बाद महावीर ने अपने बड़े भाई की अनुमति के द्वारा गृह त्याग दिए थे।
• पहले इन्होने एक वस्त्र धारण किया था फिर 13 माह बाद इन्होने वस्त्रो का त्याग कर दिया और नग्न अवस्था में रहने लगे ।
•12 वर्षो की कठिन तपस्या के बाद महावीर ने एक नदी के तट पर स्थित साल वृक्ष के नीचे  ज्ञान (केवल्य) प्राप्त किया ।
•जैनों के धार्मिक स्थल, जिनालय यामंंदिर कहलाते हैं।
• इसी समय के पश्चात महावीर को एक नदी के तट पर स्थित साल वृक्ष के नीचे  ज्ञान (केवल्य) प्राप्त किया ।

jain dharm

• जिन – विजेता
• अर्हत – पूज्य
• निर्ग्रन्थ – बंधनहीन

•जिन के आधार पर ही महावीर के अनुयायी जैन कहलाए और महावीर के द्वारा चलाया गया धर्म ” जैन धर्म ” के नाम से जाना गया ।
• इसके बाद महावीर ने अपना प्रथम उपदेश राजगीर में पाली भाषा में दिया था ।
•महावीर के अनुयायियों को निग्रन्थ कहा जाता था और महावीर के प्रथम अनुयायी उनके दामाद जामिल बने थे ।
• महावीर ने भिक्षुओ को पंच महाव्रत करने का उपदेश दिया था, लेकिन ये पंच महाव्रत बहुत ही कठिन थे, इनका पालन करना ग्रहस्थो के लिए संभव नहीं था इसलिए महावीर ने ग्रहस्थो को पंच अणुव्रत करने का उपदेश दिया ।

I. अहिंसा – किसी भी जीव को मन, वचन, काय से पीड़ा नहीं पहुँचाना। किसी जीव के प्राणों का घात नहीं करना।
II. सत्य – हित, मित, प्रिय वचन बोलना।
III. अस्तेय – बिना दी हुई वस्तु को ग्रहण नहीं करना।
IV. ब्रह्मचर्य – मन, वचन, काय से मैथुन कर्म का त्याग करना।
V. अपरिग्रह– पदार्थों के प्रति ममत्वरूप परिणमन का बुद्धिपूर्वक त्याग

• जैन धर्म के त्रिरत्न :

✅सम्यक ज्ञान

✅सम्यक दर्शन

✅सम्यक आचरण ।

• जैन धर्म के ग्रंथो को अंग तथा बौद्ध धर्म के ग्रंथो को त्रिपिटक कहा जाता है ।

” कल्पसूत्र ” जैन धर्म का महत्वपूर्ण ग्रन्थ है जिसकी भाषा संस्कृत है और इसकी रचना भद्रबाहु ने की ।

✍ जैन धर्म मानने वाले राजा : चन्द्रगुप्त मौर्य, उदयिन, चंदेल शासक

•चन्द्रगुप्त मौर्य के शासन काल में ही प्रथम जैन संगीति का आयोजन पाटलिपुत्र में किया गया था और यही से

•जैन धर्म दो सम्प्रदायों में विभाजित हो गया ।

दिगम्बर : नग्न रहने वाले

श्वेताम्बर : श्वेत वस्त्र धारण करने वाले

•चंदेल शासको ने ही खजुराहो में प्रसिद्ध जैन मंदिरो का निर्माण कराया था ।

•दिलवाड़ा के जैन मंदिरो का निर्माण चालुक्यो सोलंकियों ने करवाया था ।

• 72 वर्ष की आयु में महावीर की मृत्यु 468 ई सा पूर्व में बिहार राज्य के पावापुरी में हुई थी ।

✍ बौद्ध धर्म और जैन धर्म में अंतर :

•बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार विदेशो में हुआ जबकि जैन धर्म का भारत तक ही सिमित रहा ।

•जैन धर्म के ग्रंथो को अंग तथा बौद्ध धर्म के ग्रंथो को त्रिपिटक कहा जाता है ।

• जैन धर्म में घोर तपस्या को शुभ मना जाता है जबकि बौद्ध धर्म में तपस्या का विरोध किया गया ।

‌Note : दक्षिण भारत मे प्रसिद्ध जैन केंद्र श्रवणबेलगोला मे स्थित है ।

तीर्थंकर

• प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव की प्रतिमा (कुण्डलपुर, मध्य प्रदेश
• जैन धर्म मे 24 तीर्थंकरों को माना जाता है। तीर्थंकर धर्म तीर्थ का प्रवर्तन करते है। इस काल के 24 तीर्थंकर है-

क्रमांक   तीर्थंकर

1 ऋषभदेव- इन्हें ‘आदिनाथ’ भी कहा जाता है
2 अजितनाथ
3 सम्भवनाथ
4 अभिनंदन जी
5 सुमतिनाथ जी
6 पद्ममप्रभु जी
7 सुपार्श्वनाथ जी
8 चंदाप्रभु जी
9 सुविधिनाथ- इन्हें पुष्पदन्त‘ भी कहा जाता है
10 शीतलनाथ जी
11 श्रेयांसनाथ
12 वासुपूज्य जी
13 विमलनाथ जी
14 अनंतनाथ जी
15 धर्मनाथ जी
16 शांतिनाथ
17 कुंथुनाथ
18 अरनाथ जी
19 मल्लिनाथ जी
20 मुनिसुव्रत जी
21 नमिनाथ जी
22 अरिष्टनेमि जी – इन्हें ‘नेमिनाथ‘ भी कहा जाता है। जैन मान्यता में ये नारायण श्रीकृष्ण के चचेरे भाई थे।
23 पार्श्वनाथ
24 वर्धमान महावीर – इन्हें वर्धमान, सन्मति, वीर, अतिवीर भी कहा जाता है।

Jainism

•Jain is one of the oldest philosophies or religions in the world.
The actual propagation of Jainism in the 6th century AD. Sa. Seen from the east
According to Jain tradition, there were 24 Tirthankars in Jainism.
Mahavira was born in Kundalgram, Bihar; before 540 AD, his father’s name was Siddhartha, and his mother’s name was Trishla.
His parents died when Mahavira was 30 years old, after which Mahavira left home with the permission of his elder brother.
• First, he wore a garment, then 13 months later, he gave up the garment and went naked.
•After 12 years of hard penance, Mahavira attained enlightenment (Kevalya) under the Sal tree on river banks.
The religious places of Jains are called Jinalaya or temples.
• To Mahavira after this time: –

• Jin – Winner
• Arhat – Venerable
• Nirgranth – without bondage

On the basis of which Mahavira’s followers were called Jains and the religion run by Mahavira became known as “Jainism.”
• After this, Mahavira gave his first sermon in the Pali language in Rajgir
The followers of Mahavira were called Nigrantha, and the first followers of Mahavira were his son-in-law Jamil
Mahavira had instructed the monks to perform Panch Mahavrat. These Panch Mahavrats were very difficult; the householders couldn’t follow them, so Mahavira taught the householders to perform Panch Anuvrat.

I. Non-violence – not to inflict pain on any living being with mind, word, body. Not to kill the life of any creature.
II. Truth – Speaking of interest, friendship, dear words.
III. Asteya – not to accept a given thing.
IV. Celibacy – renunciation of sexual intercourse with mind, word, body.
V. Aparigraha- Intelligent renunciation of materialistic consequences towards substances

Triratna of Jainism:

✅Reasonable knowledge

✅Samyak Darshan

✅Reasonable conduct ।

The texts of Jainism are called Anga, and the readers of Buddhism are called Tripitaka

“Kalpasutra” is an essential scripture of Jainism whose language is Sanskrit, and Bhadrabahu composed it.
ain kings: Chandragupta Maurya, Udayin, Chandel ruler
The first Jain music was organized in Pataliputra during the reign of Chandragupta Maurya, and from here
Jainism split into two sects

Digambar: Naked

✍ Shwetambar: Those who wear white clothes

It was the Chandel rulers who built the famous Jain temples in Khajuraho.

Chalukyo Solankis built Jain temples of Dilwara.
Mahavira died at the age of 72 in 468 BC in Pavapuri, Bihar.

Differences between Buddhism and Jainism:

Buddhism spread abroad while Jainism was limited to India

The texts of Jainism are called Anga, and the readers of Buddhism are called Tripitaka

Great austerities are considered auspicious in Jainism while austerities were opposed in Buddhism
✍Note: The famous Jain center in South India is located at Shravanabelagola

Tirthankar

Statue of Rishabhdev, the first Tirthankar (Kundalpur, Madhya Pradesh)
• 24 Tirthankars are considered in Jainism. Tirthankara Dharma enforces Tirtha. There are 24 Tirthankars of this period-

No. Tirthankar

1 Rishabhdev- He is also called ‘Adinath.’
2 Ajitnath
3 Sambhavnath
4 Abhinandan
5 Sumatinath Ji
6 Padmaprabhu Ji
7 Suparshvanath Ji
8 Chandaprabhu Ji
9 Suvidhinath- They are also called ‘Pushpadanta.’
10 Sheetalnath Ji
11 Shreyansanath
12 Vasupujya Ji
13 Vimalnath Ji
14 Anantnath Ji
15 Dharmanath Ji
16 Shantinath
17 Kunthunath
18 Arnath Ji
19 Mallinath g
20 Munisuvrat g
21 Naminath Ji
22 Arishtanemi Ji – They are also called ‘Neminath.’ In Jain’s belief, he was a cousin of Narayan Krishna.
23 Parshvanath
24 Vardhamana Mahavira – They are also called Vardhamana, Sanmati, Veer, Antivir.

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